व्यस्त जीवन के लम्हों के बीच, एक पल कभी ऐसा आता है,
कुछ चित्र पटल पे छाते हैं कुछ स्मरण मुझे हो जाता है,
एक नेता वो थे एक नेता ये.
फौजी के पोशाक में एक नेता सामने आता , लड़ने का साहस उनमे दिखता चुनौतियों को वो बुलाता,आज कफ़न के रंग का खद्दर पहने एक नेता सामने आता, आलोचना सुन के मुस्कुराता
और कहता ' भाई लड़ने से क्या फायदा ! ड्रेस न सही फेस देखकर तो समझो,
शांति का पुजारी, समझौते का समर्थक मैं, चुनौतियों से लड़ पता तो नेतागिरी के फिल्ड में क्यों आता?'
व्यस्त जीवन के लम्हों......
फटकता नहीं था कलंक पास उनके, आज ये सीने से कलंक को लगाकर कहते
कलंक नहीं कल के चुनाव में आने वाला अंक है ये .
व्यस्त जीवन के लम्हों.....
उनकी एक पुकार थी ' ईंट का जवाब पत्थर से दो 'आज ये पूंजीपतियों से कहते हैं ' सात लगा लो और सत्तर लो '
एक थे जिन्होंने आई सी एस छोड़ी देश के लिए आज भी छोड़ी जाती है पर कैश के लिए .
व्यस्त जीवन के लम्हों के बीच.......
कुछ चित्र पटल पे छाते हैं कुछ स्मरण मुझे हो जाता है,
एक नेता वो थे एक नेता ये.
फौजी के पोशाक में एक नेता सामने आता , लड़ने का साहस उनमे दिखता चुनौतियों को वो बुलाता,
और कहता ' भाई लड़ने से क्या फायदा ! ड्रेस न सही फेस देखकर तो समझो,
शांति का पुजारी, समझौते का समर्थक मैं, चुनौतियों से लड़ पता तो नेतागिरी के फिल्ड में क्यों आता?'
व्यस्त जीवन के लम्हों......
फटकता नहीं था कलंक पास उनके, आज ये सीने से कलंक को लगाकर कहते
कलंक नहीं कल के चुनाव में आने वाला अंक है ये .
एक बार उन्होंने आवाज लगाई ' तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा'
आज ये भोली जनता पे हँसते और कहते ' सुबह मुझे वोट दो शाम को ही चोट दूंगा'व्यस्त जीवन के लम्हों.....
उनकी एक पुकार थी ' ईंट का जवाब पत्थर से दो 'आज ये पूंजीपतियों से कहते हैं ' सात लगा लो और सत्तर लो '
एक थे जिन्होंने आई सी एस छोड़ी देश के लिए आज भी छोड़ी जाती है पर कैश के लिए .
व्यस्त जीवन के लम्हों के बीच.......